Saturday, January 30, 2010

आहुति दो और लिखो तकदीर

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-राजेश दीक्षित

पाली। एक विकलांग न चल सकता है और न खड़ा हो सकता है, लेकिन उसके जज्बे को सलाम करना पड़ेगा, क्योंकि उसने लोकतंत्र के यज्ञ में वोट रूपी आहुति दी। उस 90 साल से अधिक उम्र की वृद्ध महिला को ही देखिए, शरीर जबाव दे चुका है। सारे दांत निकल चुके हैं। चेहरे पर झुर्रियां पड़ गई हैं, सही ढंग से चल-फिर भी नहीं सकती लेकिन जब 'गांव की तकदीरÓ लिखने का वक्त आया तो उसने उम्र व शरीर को बाधा नहीं बनने दिया। परिजनों के सहयोग से वोट डालकर जता दिया कि वह भी अपने मताधिकार का उपयोग करने में पीछे नहीं है।

ये दो उदाहरण उन मतदाताओं के लिए सबक हैं जो मतदान के दिन घर की देहरी को नहीं लांघते और बाद में विकास नहीं होने पर अपने जनप्रतिनिधियों को कोसते रहते हैं।

इस समय पंचायतराज चुनाव हो रहे हैं। सरकार ने हमें इस समय 'गांव की तकदीरÓ लिखने वालों के चयन का मौका दिया है। यह अवसर पांच साल में केवल एक बार आता है। हमने यह मौका गंवा दिया तो हमारे पास केवल पछताने के सिवाय और कोई चारा नहीं होगा। आंकड़े गवाह हैं कि कम मतदान के कारण ही कई बार ऐसे जनप्रतिनिधि हमारे ऊपर पांच साल तक राज कर जाते हैं जिनके चयन में साठ-सत्तर फीसदी से अधिक मतदाताओं ने मोहर तक नहीं लगाई। लोकतंत्र ने मतदाता को वोट की आवाज दी है। उसे उसकी पहचान दी और जनप्रतिनिधि चुनने का पूरा हक दिया है, तो फिर वोट देने में आनाकानी क्यों? अपने मताधिकार का उपयोग नहीं करने में इतनी लापरवाही क्यों? गांव का विकास चाहते हैं तो फिर 'गांव की तकदीरÓ लिखने वालों के चयन में यह उदासीनता क्यों?

अब जब यह अवसर मिला तो हम चूक नहीं जाएं और हर हाल में, किसी भी परिस्थिति में मतदान करना ही है। इस लोकतंत्र के यज्ञ में मतदान की आहुति देने में लापरवाही करना यानी अपनी ही तकदीर लिखने वालों को मनमानी करने का अधिकार देना होगा। अब यह फैसला आपको ही करना है कि वोट देकर गांव के विकास में भागीदारी निभानी है या फिर उदासीन, लापरवाह बनकर अपने हाल में बैठना है। वोट नहीं देने पर पांच साल तक सिर्फ हाथ मलने के अलावा कुछ नहीं रहेगा।

Thursday, January 28, 2010

पाली की राजनीतिज्ञ

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पाली जिले के विधायक
पाली विधानसभा
वर्ष विधायक हारे
१९५२ बिशनसिंह-निर्दलीय मूलचंद डागा-कांग्रेस
१९५७ मूलचंद डागा-कांग्रेस मोहनलाल-कम्यूनिष्ट
१९६२ केसरीसिंह-एसडब्लयूटी मूलचंद डागा-कांग्रेस
१९६७ मूलचंद डागा-कांग्रेस केसरीसिंह-एसडब्लयूटी
१९७२ शंकरलाल-कांग्रेस किसनाराम-निर्दलीये
१९७७ मूलचंद डागा-कांग्रेस छोगालाल गादिया-जनता पार्टी
१९८० माणकलाल मेहता-कांग्रेस-आई केसरीसिंह-भाजपा
१९८५ पुष्पादेवी- भाजपा शौकत अली-कांग्रेस
१९९० पुष्पा देवी-भाजपा भीमराज भाटी-कांग्रेस
१९९३ भीमराज भाटी-निर्दलीय पुष्पा देवी-भाजपा
१९९८ ज्ञानचंद पारख-भाजपा भीमराज भाटी-कांग्रेस
२००३ ज्ञानचंद पारख-भाजपा भीमराज भाटी-कांग्रेस
२००९ ज्ञानचंद पारख-भाजपा भीमराज भाटी-निर्दलीय

पाली जिला प्रमुख

अब तक के जिला प्रमुख/ प्रशासक

नाम जिला प्रमुख/ प्रशासक कब से कब तक पार्टी

1. हरिश चंद माथुर जिला प्रमुख 1961 से 4.1.62 कांग्रेस

2. शंकरलाल जिला प्रमुख 5.1.62 से 26.2.62 कांग्रेस

3. फूलचंद बाफणा जिला प्रमुख 27.2.62 से 28.2.65 स्वतंत्र पार्टी

4. सज्जन सिंह जिला प्रमुख 1.3.65 से 3138.77 स्वतंत्र पार्टी

5. प्रियदर्शी ठाकुर प्रशासक (आईएएस) 31.8.77 से 30.4.78

6. गजेन्द्र हल्दिया प्रशासक (आईएएस) 25.5.78 से 11.7.79

7. आनंद प्रसाद सक्सेना प्रशासक (आईएएस) १२.7.79 से 17.2.81

8. के.एल.मीणा प्रशासक (आईएएस) 18.2.81 से 11.1.82

9. सी.धर्मीचंद जैन जिला प्रमुख 11.1.82 से 4.8.91 कांग्रेस

10. तपेश पंवार प्रशासक (आईएएस) 4.8.91 से 9.5.92

11. श्रीमत पाण्डेय प्रशासक (आईएएस) 9.5.92 से 9.9.94

12. मुकेश शर्मा प्रशासक (आईएएस) 9.9.94 से 14.2.95

13. श्रीमती सुशीलकुमारी जिला प्रमुख 14.2.95 से 2.2.2000 भाजपा

14. चतराराम सीरवी जिला प्रमुख 13.2.2000 से 11.2.2005 भाजपा

15. सुश्री ममता मेघवाल जिला प्रमुख 11.2.05 से अब तक भाजप


पाली जिले के सांसद

१९५२ से अब तक

वर्ष सांसद पार्टी

१९५२ अजीत सिंह निर्दलीय

१९५७ हरीश चंद्र माथुर कांग्रेस

१९६२ जावंत राय मेहता कांग्रेस

१९६७ सुरेंद्र कुमार तापडिय़ा स्वतंत्र पार्टी

१९७१ मूलचंद डागा कांग्रेस

१९७७ अमृत नाहटा जनता पार्टी

१९८० मूलचंद डागा कांग्रेस

१९८४ मूलचंद डागा कांग्रेस

१९८८ (उपचुनाव) शंकरलाल कांग्रेस

१९८९ गुमानमल लोढ़ा भाजपा

१९९१ गुमानमल लोढ़ा भाजपा

१९९६ गुमानमल लोढ़ा भाजपा

१९९८ मीठालाल जैन कांग्रेस

१९९९ पुष्प जैन भाजपा

२००४ पुष्प जैन भाजपा

२००९ बद्रीराम जाखड़ कांग्रेस









नगर परिषद पाली में अब तक के सभापति

सभापति कार्यकाल पार्टी

१.ए एच थामस ५.१.४५ से १.७.४८

२.रामसुख गुप्ता २.७.४८ से ३१.६.५९ कांग्रेस

३.रामसुख गुप्ता १.८.५९ से ११.६.६१ कांग्रेस

४.मूलचंद डागा १२.६.६१ से २४.६.६६ कांग्रेस

५.डी.डी.सोलंकी २५.६.६६ से २०.६. ६९

६.मूलचंद डागा ३.११.७० से १३.४.७२ कांग्रेस

७.देवीचंद लोढा १४.४.७२ से २३.८.७३

८.अशोक भाटी २४.८.७३ से २०.९.७३ कार्यवाहक

९.मूलचंद डागा २१.९.७३ से ११.१२.७३ कांग्रेस

१०.केवलचंद गुलेच्छा ३०.१.८७ से १५.१.८९ कांग्रेस

११.डॉ. मो. इकबाल १६.१.८९ से २८.३.८९ कार्यवाहक कांग्रेस

१२.पुरुषोत्तम गर्ग २८.३.८९ से १९.४.८९ कार्यवाहक कांग्रेस

१३.मांगीलाल गांधी १९.४.८९ से २८.१.९२ कांग्रेस

१४.ज्ञानचंद पारख २९.११.९४ से २८.११. ९९ भाजपा

१५.कुसुम सोनी २८.११.९९ से २७.११.०४ भाजपा

१६.प्रदीप हिंगड़ २७.११.०४ से ११.६.०७ कांग्रेस

१७.राकेश भाटी ११.६. ०७ से १६.८.२००७ ..... भाजपा कार्यवाहक

१८.प्रदीप हिंगड़ १६.८.२००९............ से अब तक कांग्रेस

19.केवलचंद गुलेच्छा- 26.11.2009 से

अब तक के उपसभापतियों की सूची



उपसभापति का नाम कार्यकाल

1.लक्ष्मी नारायण बिहाणी 2.7.48--11.6.61

2.मांगीलाल कोका 12.6.61--24.6.66

3.मो.शरीफ वकील 25.6.66--25.6.69

4.मांगीलाल कोका 21.6.69--13.4.72

5.अशोक भाटी 14.4.72--13.4.72

6.मांगीलाल कोका 21.9.73--11.12.73

7.डॉ. इकबाल 30.1.87--28.3.89

8.अजीज दर्द 29.3.89--28.1.92

9.सूरजदेवी सांखला 29.11.94--28.11.99

10.गुमानमल भंसाली 29.11.99--28.11.2004

11.राकेश भाटी- 28.11.2004--27.11.2009

12.शमीम मोतीवाला 27.11.2004--

Wednesday, January 27, 2010

समधी-समधन की जय हो

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सु बह-सुबह पंडितजी चाय की थड़ी पर मिले। हमें देख बोले, चाय पीने की इच्छा है क्या? हम बोले, ऐसी सर्दी में चाय पीने को कौन मना करेगा? चाय पीते-पीते पंडितजी अचानक बोले, सच बोलने से फायदा होता है या नुकसान। एकदम अप्रत्याशित सवाल से हम झेंप गए। समझ में नहीं आया कि ऐसा सवाल क्यों पूछा ? माथे पर जोर दिया, बोले सच बोलने से भला क्या नुकसान होगा। वे एकदम जोर-जोर से हंसे, अरे महानुभाव सच बोलने से भी भला कभी फायदा हुआ है। सच बोल मत देना नहीं तो कहीं के नहीं रहोगे। देखो, उस सुश्री महिला नेता को। सच बोलने के चक्कर में पार्टी से दूध से मक्खी की तरह बाहर कर दिया है। हमने पूछा, पर उसने सच बोला ही क्यों? उसे तो टिकट चाहिए भी नहीं था।

पंडितजी बोले, असल में क्या हैं कि 'एक दलÓ में टिकट बांटने वाले एक नेता को अपने समधी-समधन पर प्यार उमड़ गया। समधी-समधन ठहरे दूसरी पार्टी वाले। इन्हें चुनाव में जिताना था। इस चक्कर में ऐसे लोगों को ही टिकट दिया जो चुनाव लडऩे से पहले ही समधी-समधन का मैदान छोड़ जाएं। यह महिला नेता को नहीं जमी, और उसने उड़ता तीर पकड़कर आलाकमान से शिकायत कर डाली। महिला नेता ने बस यही सच बोल दिया और ठाली-बैठे नुकसान उठा लिया।

हम बोले, पंडितजी आप भी बिल्कुल भोले हो। अब भला ऐसा कौन मूर्ख होगा जो समधी-समधन का ख्याल नहीं रखेगा। पार्टी का तो क्या है, एकाध प्रत्याशी हार भी जाएगा तो क्या फर्क पड़ेगा। अगर समधी-समधन नाराज हो गए तो पार्टी खाक काम आएगी। आखिर बेटी की ससुराल का मामला है। पंडितजी बोले, अरे कैसी बात करते हो। पार्टी का अपना महत्व है। पार्टी के लिए तो सब मरते हैं। अब भला समधी-समधन के लिए पार्टी की बलि चढ़ती है?

हम बोले, पंडितजी आपका भेजा क्या घास चरने गया है। जो ऐसी ऊल-जलूल बातें कर रहो हो। टिकट बांटने वाले ने समधी-समधन को जिताने के चक्कर में उसके नौकरों को अपनी पार्टी से टिकट दे दिया। नाम वापसी का समय आया तो उन्होंने समधी-समधन के सामने चुनाव लडऩे से मना कर दिया और मैदान छोड़ भागे। अब आराम से बिना लड़े ही समधी-समधन निर्विरोध जीत गए। अब नया फंडा राजनीति में इजाद हुआ है। इसके लिए तो उन्हें साधुवाद दिया जाना चाहिए। आखिर ऐसे नए-नए प्रयोग राजनीति में भी होने लगे हैं। वो तो महिला नेता ही नासमझ है जो समधी-समधन की जीत से जल रही हैं।

पंडितजी नाराज होकर बोले, तुम भी खामखां टिकट बांटने वाले की तारीफ के पुल बांध रहे हो। आलाकमान ने तो महिला नेता की ऐसी-तैसी कर डाली। लेकिन टिकट बांटने वालों को छोड़ दिया। उससे एक बार भी नहीं पूछा, भैय्या तुमने ऐसे लोगों को टिकट क्यों दिया जो 'गधे के सिर से सींग की तरहÓ गायब हो गए। टिकट देने से पहले थोड़ा बहुत तो पार्टी का ख्याल रखना चाहिए था।

अब हमसे रहा नहीं गया, बोले पंडितजी! अब आप सुनना ही चाहते हो तो सुनो। सोच-समझकर तो जब टिकट देते, जब कोई लेने वाला होता। सुमेरपुर में उसको टिकट दे दिया जिसने टिकट मांगा ही नहीं। एक उस महिला को टिकट दे दिया जिसे अपनी उम्र का ही भान नहीं। एक प्रत्याशी अधिक बच्चों के चक्कर में मैदान छोड़ गया। दो-तीन प्रत्याशी ऐसे निकले जिन्होंने नाम वापस ले लिया। अब भला समधी-समधन के सामने वाले प्रत्याशी ने नाम वापस ले लिया तो इतना हल्ला क्यों? समधी-समधन की जय बोलो और चाय के पैसे देकर अपने घर जाओ। राजनीति में नए प्रयोग के लिए धन्यवाद दो। - वोटर

स्वागतम

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आज के बाद हम आपसे मिलते रहेंगे
 
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