Friday, April 9, 2010

अधिकार के आगे सुविधाएं जीरो

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9 अप्रेल-2010

अधिकार के आगे सुविधाएं जीरो

- राजेश दीक्षित---

छह से चौदह वर्ष के सभी बच्चों को शिक्षा का मौलिक अधिकार मिलना वाकई में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। लेकिन इसी अधिकार को पाली जिले को आधार बनाकर देखें तो खुशी काफूर होने में पलभर भी नहीं लगेगी। वर्तमान में भी शिक्षा से वंचित बच्चों को जोडऩे के लिए सरकार के प्रयास जारी हैं, लेकिन स्कूलों में जो सुविधाएं हम बच्चों को दे रहे हैं वे इतनी कम हैं कि बच्चा स्कूल आकर भी वापस चला जाता है। -गत वर्ष की ही बात करें तो आश्चर्य होगा कि जिले में पांच हजार बच्चे शिक्षा की चौखट तक आए, क, ख, ग भी सीखा, लेकिन कुछ दिनों बाद ही वे अपने घरों को लौट गए। इसके अलावा अब भी 1483 ऐसे बच्चे गलियों में भटक रहे हैं जिन्होंने आज तक स्कूल की दहलीज पर कदम भी नहीं रखा। ये आंकड़े तो केवल सरकारी ही हैं, हकीकत में तो अकेले पाली शहर की कई बस्तियों में सैकड़ों बच्चे अब भी शिक्षा से कोसो दूर ही हैं। -माना, बच्चों को स्कूल से जोड़ भी लिया तो वहां सुविधाओं का इतना टोटा है कि बच्चे परेशान होकर ही वापस लौट जाएं। इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या होगा कि 19 प्रतिशत विद्यालयों में तो केवल एक ही शिक्षक कक्षाओं को एक साथ पढ़ा रहा है। ऐसे में पढ़ाई कैसी होगी, यह बताने की जरुरत नहीं। ताज्जुब तो इस बात का है कि 65 फीसदी विद्यालयों को बिजली का इंतजार है। गर्मियों में तो किताब-कॉपियों से पसीने सुखाते हैं। और तो और जिले में 35 विद्यालय ऐसे हैं जहां बच्चे घरों से पानी लेकर चलते हैं उन्हें मालूम है कि स्कूल में पानी नहीं मिलेगा। सबसे बुरी हालत सोजत ब्लॉक की है, जहां छह फीसदी विद्यालयों के बच्चों को पानी नसीब नहीं है। -यह तो उन विद्यालयों की स्थिति है जो मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझा रहे हैं, लेकिन इन विद्यालयों का क्या करें जहां विद्यालय तो हैं लेकिन उसका कोई भवन ही नहीं। यानी 52 प्राथमिक और 17 उच्च प्राथमिक विद्यालय भवन के इंतजार में हैं। ऐसे में अन्य सुविधाओं की बात करना ही बेमानी है। सरकार ने दिल खोलकर तो स्कूल खोल दिए, लेकिन सुविधाएं नहीं होने से परेशानी बच्चों को ही हो रही है। -शिक्षा के मौलिक अधिकार से भले ही बच्चों को शिक्षा देने का कानून बना दिया गया है, लेकिन जब तक स्कूलों में सुविधाएं नहीं जुटाई जाएंगी और ड्राप आउट बच्चों की संख्या कम नहीं होगी तब तक कानून केवल कागजी ही रह जाएगा।

5 comments:

  1. blog jagat me swagat hai madsahab

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  2. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

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  4. भैया सुविधायें तो सरकार देने की सोचती रहती है. लेकिन उन सुविधाओं को बनाने और पहुँचाने वाले लम्बी सरकारी छुट्टी पर गए हुए हैं. और जो कार्य पर मौजूद हैं वो दिल्ली को चमकाने में लगे हुए हैं. आपको पता नहीं कि दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय कब्बड्डी होने वाली है. रात-दिन काम चल रहा है. अभी कोई बात ना करे सांस लेने की फुर्सत नहीं है. और आप बच्चों की शिक्षा का रोना लेकर बैठ गए. अभी पैदा हुए हैं थोड़ा खेल लेने दीजिये. शिक्षा का क्या है बाद में शिक्षित होकर भी तो बेरोज़गार ही रहना पडेगा. थोड़ा उन्हें मस्ती मारने दीजिये.

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